आज वक्त तुम्हारा है कल हमारा होगा।
फितरत ही की तो बात है….
इक छुअन से तुम किसी की सांसों में समा जाते।
थोड़े बदले संस्कार हमारे हैं…
वरना हम भी किसी से हाथ नहीं मिलाते।
क़दम क़ैद करना डर का प्रतीक नहीं,
ताकत से लड़ना हर बार ठीक नहीं।
तुझसे भी सीखा हमने एक होना,
वरना भूल गए थे घर का कोना।
लड़ रहे हैं जो तुझसे दिन रात,
भूल कर अपने सभी जज्बात।
मेहनत उनकी रंग लाएगी,
खुशियां फिर वापस आएगी।