जिंदगी का तजुर्बा खूब है मुझे,
जब टूटा डाली से,कांटों ने थांबा मुझे।
ज़ख्म जो अपनों से मिला था,
दुनिया ने भी खूब कुरेदा था उसे।
मतलब परस्त है यहां सभी,
वरना कौन अपना पराया होता है।
मैंने अपनों से अलग होकर,
दुनिया में प्यार जगाया है..
कभी देवों के चरणों की शोभा,
तो कभी प्रेमिका के सर का ताज,
कभी शहीदों के रंग में रंगा मैं,
तो कभी बच्चों के संग खिला मैं।
नाजुक था मैं कमजोर नहीं,
उम्र के आगे किसी का जोर नहीं।

ख़िरमन