जब भी लिखा करता हूं,

नाम तेरा लिखती मेरी कलम है।


प्यार तुझसे मैं करता हूं,

इश्क लड़ाती मेरी कलम है।


जब नाम तेरा देखा करता हूं,

ख्वाबों में डूबती मेरी कलम है।


यादों के सफ़र में गुम जाता हूं,

वापस ढूंढ लाती मेरी कलम है।


K_logs(केशव डेहरिया)

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