यादों में ना जाना “केशव”
इनमें वक्त का जोर नहीं।
तब की जिंदगी आज को भुला देगी,
कुछ मीठी तो कुछ तुझे रुला देगी।
तेरी मजाल है क्या?
जो इसके जाल से बच पायेगा।
टूटा ये जाल तो,
फिर भी तू पछताएगा।
यादों में ना जाना “केशव”
इनमें वक्त का जोर नहीं।

K_logs(केशव डेहरिया)