अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस

शुरूआत 1 मई 1886

भारत में एक मई का दिवस सब से पहले चेन्नई में 1मई 1923 को मनाना शुरू किया गया था।

किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में मज़दूरों, कामगारों और मेहनतकशों की अहम भूमिका होती है।कामगारों के बिना कोई भी औद्योगिक ढांचा खड़ा नहीं रह सकता।

  • क्या सच में मजदूरों को उनके नाम का एक अंतरराष्ट्रीय दिवस देकर उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है?
  • या उन्हें वे सभी अधिकार दिए जाते हैं जो किसी अन्य कर्मी को दिया जाता है?

कार्यकुशलता के आधार पर वेतन भुगतान किया जाता है लेकिन सामाजिक ऊंच-नीच जो मजदूरों के साथ होती है वह निंदनीय है।

कार्यस्थल पर मजदूरों से बेजुबान जानवरों जैसा व्यवहार किया जाता है मजदूरों को प्रताड़ित करना मालिकों का हक बनता जा रहा है।

जहां मजदूर यूनियन हैं वहां उनके अधिकारों को सुन भी लिया जाता है, लेकिन ऐसे छोटे संस्थान या वह जगह जहां पर मजदूर यूनियन नहीं होते हैं वहां मजदूरों की बड़ी गंभीर स्थिति है।

हर कामगार इंसान जो अन्य किसी व्यक्ति संस्था मालिक के अंतर्गत काम करता हो उसके स्वयं के अपने अधिकार है और वह अपनी आवाज उठा सकता है अगर उसे लगे कि वह प्रताड़ित हो रहा है तो उसे रोजगार की फिक्र किए बिना अपने अधिकार के लिए आवाज उठाना चाहिए।

डॉ भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि किसी देश की तरक्की उस देश के कामगारों और किसानों पर निर्भर करती है।

K_logs(केशव डेहरिया)