नहीं अब नहीं सहना इस पापी दरिंदे की दरिंदगी आज मेरा बेटा आ रहा है शहर से उसे सब कुछ बता दुंगी। अब तो उसकी नौकरी भी लग गई है,यहां की इस काली दुनिया से चले जायेंगे। बेटी तेरी आगे की पढ़ाई भी वहीं रहकर करना, इस गांव में अब कभी नहीं आयेंगे। बेटे से कहकर यहां का घर और खेत बिकवा दूंगी। तुम्हारे पिताजी कभी नहीं चाहते की हम पुरखों की इस छोटे से घर को बेचकर कहीं और चले जाएं। उनके गुजरने के बाद से ही तुम्हारे चाचा की दरिंदगी से परेशान हूं, न किसी से कह सकती न ही मर सकती, तुम दोनों का मुह देखकर ही जिंदा हूं बेटी। मां कि इन बातों को सुन बेटी फफक-फफक कर रो पड़ी,वह मन ही मन सोच रही थी कि मां को समझाऊं या अपना दर्द उन्हें बताऊं। अभी तक वह केवल इसलिए सब कुछ सहते रही क्योंकि चाचा ने धमकी दिया था कि बदनाम कर दुंगा अगर किसी को कुछ भी बताया। रितु को आज पता चला कि चाचा ने दोनों मां-बेटी को ही प्रताड़ित किया है, रितु ने कुछ हिम्मत जुटा कर मां से कहा,,,

“”मां जब तुम चली जाती थी खेत,चाचा आ जाते थे मुझे अकेले देख।

नहीं करते मुझ पर कोई रहम,धमकी के डर से में जाती सहम।

कहते मुझे कपड़े उतारने को,जो मैं ना उतारा करती तो।

दिखाकर तस्वीर मेरी, धमकी देती बदनामी की।

है कैद वह तस्वीर मेरी, न जाने किस वक्त नहाने की।

देख मुझे वह हब्सी निगाहों से,खाट पर गिरा देते अपनी कठोर बाहों से।

मिन्नते जाती मेरी बेकार, मां हार जाती मैं हर बार।

विनती करती बख्श दो आबरू मेरी, चाचा, भतीजी हुं मैं तुम्हारी।

बांध कर हाथ मेरे खाट से,मारा करता मुझे लात से।

कहीं चीख ना निकले दर्द के मारे,कच्छा निकाल ठूंस देते मुंह पर मेरे।

मां दरिंदा है वह एक न सुना विनती मेरी, न जाने कितनी बार लूटी अस्मत मेरी।

मारे दर्द के बेहोश हो जाती, आंखें खुलती तब भी ऊपर ही पाती।

नहीं बचा पाई मेरी अस्मत मैं, न जाने क्या लिखा है मेरी किस्मत में।”””

मां- बेटी अाज भी इंतजार कर रहीं है, उनका बेटा- भाई आकर उन्हें इस नरक से निकालेगा।

महिलाओं के उत्पीड़नकर्ताओं के मन में सजा का भय ही नहीं है यही वजह है कि बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामलों में वृद्धि हो रही है. इन मामलों में सजा अत्याधिक कठोर होना चाहिए।
कई ऐसे मामले हैं जिनकी जानकारी पुलिस तक नहीं पहुंचती केवल बदनामी के डर से,,,,,

” अत्याचार सहना बदनामी से भयानक है। “

___________________केशव डेहरिया ” K_logs”