इलजामात और बयानात चल रहे थे,

मोहब्बत की अदालत में।

उनकी जुल्फों ने सबूत पेश किए,

हम गुनाहगार हो गए।

निगाहों ने सजा सुनाई,

हम उनके दिल में कैद हो गए।

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